"Women are the best creation of the
world", "Women are the best gift of God", Importance of letters
of the word- "WOMEN" etc.
महिलाओं के "महिमामंडन" करने
की इसी प्रवृत्ति ने उनकी ये दुर्दशा की है। please, please, महिला
को मात्र एक "महिला" ही रहने दीजिए; उन्हें
किसी विशेष स्थान की आवश्यकता नहीं है; वह
देवी नहीं हैं; बस एक सामान्य इंसान हैं।
महिलाओं को भी ठीक उसी तरह भूख-प्यास
लगती है,
जैसे
कि किसी पुरुष को। उनका मान-सम्मान उसी तरह आहत होता है,
जैसे
कि किसी पुरुष का। स्त्री को किसी भी मामले में पुरुष पर "वरीयता" नहीं
चाहिए;
उसे
तो बस बराबरी चाहिए।
आज महिलाओं की एक ही विनती है - "हे पुरुष जगत! मुझे सिर्फ और केवल सिर्फ
"बराबरी" का दर्जा दे दो। मेरा अपना "नाम" हो,
मैं
तुम्हारे नाम से न जानी जाऊँ; मेरा
अपना "स्वतंत्र व्यक्तित्व हो", मैं
तुम पर आश्रित न रहूँ ।"
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