Sunday, 17 May 2015

मोदी जी का चीन दौरा : एक नए युग की शुरुआत

भारत और चीन के बीच जिन 63 हजार करोड़ रूपये के 24 कारोबारी समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं, वे बड़े महत्वपूर्ण हैं; मगर उनपर अमल भारत सरकार पर निर्भर करेगा। चीन तभी निवेश करेगा, जब उसे माहौल मिलेगा। जमीनी स्तर पर सर्वे करने के बाद चीन पूंजी निवेश करेगा। चीन के राष्ट्रपति शी जिंनपिंग पिछले साल भारत दौरे पर आए थे, तब भी कई समझौतों पर हस्तक्षातर हुए थे, लेकिन अभी तक निवेश नहीं हुआ है।

चीन के पास 4 ट्रिलियन यूएस डॉलर रिजर्व है। वह इसे निवेश करना चाहता है। भारत का जीडीपी ग्रोथ सात फीसदी से ज्यादा है और निवेश के लिहाज से भारत से ज्यादा आकर्षक बाजार पूरे विश्व में नहीं है। लेकिन, भारत के ज्यादातर हिस्सों में जमीन, बिजली, सड़क, पानी, लेबर, इंटरनेट, लोकल गवर्नेंस की भारी दिक्कत है।

चीन अगर निवेश करेगा तो गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में ही, क्योंकि इस तरह की दिक्कतें इन राज्यों में ज्यादा नहीं है। चीन पूर्वोतर के राज्यों में निवेश करने से हिचकेगा क्योंकि यहां बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं और सबसे बड़ी बात है इन इलाकों में मजदूर आंदोलन का खतरा भी ज्यांदा रहता है।

चीन माइनिंग, पोर्ट, रेलेवे, इंफ्रा में निवेश को इच्छुक है। चीन को बुलेट ट्रेन के क्षेत्र में महारत हासिल है, लेकिन सवाल है कि लोकल गवर्नमेंट से उम्मीद के मुताबिक सहयोग मिलेगा? बुलेट ट्रेन चलाने के लिए बड़े पैमाने पर जमीन की जरूरत होती है। बड़ा सवाल है कि जमीन अधिग्रहण आसानी से हो सकेगा?

चीन में अब प्रोडक्शन महंगा हो रहा है। इसलिए वहां की कंपनियां भारत में निवेश करना चाहती हैं। भारत को इसका फायदा उठाना चाहिए।
रेलवे को ज्या दा फायदा

भारत में निवेश को लेकर चीन का नजरिया काफी सकारात्मक है। इससे रेलवे को काफी ज्यादा मिलने वाला है।

- भारत में रेलवे को आधुनिक बनाने की मोदी सरकार की योजना को जापान, फ्रांस और चीन बड़े बाजार के रूप में देख रहे हैं। इसकी वजह यह है कि रेलवे अगले पांच साल में 137 अरब डॉलर का निवेश चाहता है।

- मुंबई और अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन चलाने के लिए मोदी जापान के साथ करार कर चुके हैं। अनुमान है कि 5 से 6 साल में 800 अरब रुपए की लागत से यह काम हो सकेगा। लेकिन चीन इस मामले में जापान से आगे निकलना चाहता है। मोदी की यात्रा से पहले पिछले हफ्ते रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने मीडिया को बताया था कि कई समझौतों पर चीन से बातचीत चल रही है।

- जापान की दिलचस्पी जहां मुंबई-अहमदाबाद रूट पर है, चीन दिल्ली-चेन्नई के बीच 2000 किलोमीटर के प्रस्तावित हाई स्पीड कॉरिडोर में है। चीन यह भी चाहता है कि जब तक पूरी फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार हो, तब तक वह दिल्ली-आगरा रूट पर काम शुरू कर दे। इस कॉरिडोर पर 2500 अरब रुपए खर्च हो सकते हैं।

-25 अप्रैल को चीन के नेशनल रेलवे ब्यूरो के प्रतिनिधिमंडल ने भारत का दौरा किया था। ब्यूरो की वेबसाइट के मुताबिक चीन भारतीय रेलवे के किसी भी इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में निवेश करने में दिलचस्पी रखता है।

भारत-चीन के बीच हुए 63 हजार करोड़ रुपए के ये 24 समझौते

चीनी प्रधानमंत्री के साथ मोदी की प्रतिनिधिमंडलस्तकरीय द्विपक्षीय वार्ता के बाद जो समझौते किए गए उनमें शिक्षा, माइनिंग और स्किल डेवलपमेंट जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। 

दोनों देशों के बीच हुए ये 24 समझौते:

1 एजुकेशन एक्सचेंज प्रोग्राम।
2 माइनिंग एंड मिनरल सेक्टर में सहयोग।
3 चीन के सहयोग से अहमदाबाद में महात्मा गांधी स्किल डेवलपमेंट इंस्टिट्यूट बनाया जाएगा
4 भारत के सहयोग से चीन में योग कॉलेज खुलेगा।
5 अंतरिक्ष के क्षेत्र में सहयोग।
6 चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के इंटरनेशनल डिपार्टमेंट के साथ भारतीय विदेश मंत्रालय का समझौता।
7 चीन की सरकारी प्रसारण कंपनी सीसीटीवी और दूरदर्शन के बीच सहयोग।
8 टूरिजम के सेक्टर में सहयोग।
9 इंडिया-चाईना थिंक टैंक की स्थापना
10 भूकंप विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में सहयोग
11 चीन के डेवलपमेंट रिसर्च सेंटर और नीति आयोग के बीच सहयोग।
12 समुद्र विज्ञान, क्लाइमेट चेंज के क्षेत्र में सहयोग।
13 चेंगडू और चेन्नई में खुलेंगे कौंसुलेट।
14 ट्रेड निगोशिएशन के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने के मद्देनजर से कौंसुलेटिव मेकेनिजम तैयार किया जाएगा।
15 इंपोर्ट के क्षेत्र में सेफ्टी रेगुलेशन।
16 भू विज्ञान के क्षेत्र में सहयोग।
17 दोनों देशों के राज्यों और म्यूनिसिपैलिटीज के बीच सहयोग- इंडो चाइना लीडर्स फोरम की शुरुआत।
18 सिस्टर सिटीज चेन्नई और चेंगड़ू के बीच
19 सिस्टर सिटीज हैदराबाद और क्विंगडाऊ,
20 सिस्टर सिटीज औरंगाबाद और डनहंग में बनेंगे
21 सिस्टर सिटीज कर्नाटक और सिचुआन के बीच
22 गांधीवादी अध्ययन के लिए सेंटर बनेगा।
23 वोकेशनल एजुकेशन और स्किल डेवलपमेंट के क्षेत्र में सहयोग
24 रेलवे के क्षेत्र में सहयोग।

ANALYSIS: चीनियों को ई-वीजा देने के मोदी के एलान पर उठे कई सवाल
चीन दौरे पर गए पी एम नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को शिन्हुमआ यूनिवर्सिटी में भाषण के दौरान चीनी नागरिकों के लिए ई-वीजा देने का एलान किया। इसे लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। पहला सवाल तो यही है कि क्या विदेश मंत्रालय को मोदी सरकार के इस फैसले की जानकारी नहीं थी? यह सवाल इसलिए उठ रहा है, क्योंकि पीएम के एलान से कुछ घंटे पहले ही विदेश सचिव एस जयशंकर ने मीडिया के एक सवाल के जवाब में कहा था, ''हम विभिन्न देशों को धीरे-धीरे ई-वीजा की सुविधा बढ़ा रहे हैं। चीन पर कोई फैसला नहीं हुआ है।''

दूसरा सवाल यह है कि क्या  मोदी चीन के प्रति ज्याीदा दरियादिली दिखा रहे हैं?
पूर्व राजनयकि जी पार्थसारथी ने दैनिकभास्कदर.कॉम को बताया कि मोदी के एलान को आप सरकार की दरियादिली या फिर सकारात्मैक संदेश देने की नीयत से उठाया गया कदम कह सकते हैं। ई-वीजा सामान्यत: चार हफ्ते के लिए टूरिस्टों के लिए जारी किया जाता है। यह सुविधा उन देशों को नहीं दी जाती है जहां से घुसपैठ या दूसरे खतरे की आशंका होती है ।

तीसरा सवाल यह है कि क्याी सुरक्षा एजेंसियों की चिंताओं और चेतावनी को नजरअंदाज किया गया?
मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि चीन को इस सुविधा को देने के लिए पीएम मोदी ने सुरक्षा एजेंसियों (इंटेलिजेंस ब्यूरो और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग) की चिंताओं और चेतावनी को नजरअंदाज किया। सूत्रों के मुताबिक, मोदी के चीन विजिट से कुछ दिन पहले ही इंटेलिजेंस अधिकारियों के साथ सरकार की हाई लेवल मीटिंग हुई। इसमें चीन को ई-वीजा जारी रखने की सुविधा पर चर्चा बेनतीजा रही। इंटेलिजेंस अधिकारियों ने पूर्व में चीन के नागरिकों द्वारा देश में जासूसी की घटनाओं में सम्मलित होने को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर की। वहीं, सरकार चाहती थी कि चीन को दोस्ताना संकेत देने में देरी नहीं की जानी चाहिए। विदेश मंत्रालय और खुद पीएम चीन को ई-वीजा जारी रखने का पुरजोर समर्थन कर रहे थे। वहीं, इंटेलिजेंस एजेंसियां चाहती थीं कि पीएम के चीन दौरे तक इसका एलान न हो ताकि भारत को चीन द्वारा इसके बदले में उठाए जाने वाले कदम की जानकारी मिल सके।

चौथा सवाल- सरकार में ही था कन्फ्यूजन?
29 अप्रैल को राज्यसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए गृह राज्यमंत्री किरण रिजीजू ने कहा था, ''वर्तमान में भारत सरकार द्वारा चीनी नागरिकों को ई-वीजा जारी रखने की कोई योजना नहीं है।'' खास बात यह है कि इससे कुछ दिन पहले ही पर्यटन मंत्री महेश शर्मा ने कहा था कि सरकार आने वाले दिनों में चरणबद्ध तरीके से यूके, फ्रांस, इटली, स्पेन और चीन के लिए ई-वीजा सुविधा जारी रखने की योजना बना रही है।

मोदी सरकार ने दी सफाई
हालांकि, बाद में सवाल उठने के बाद रिजीजू ने ई-वीजा के बचाव में सफाई दी। बीते हफ्ते उन्होंने कहा कि टूरिजम को बढ़ावा देने के लिए सरकार चीन को ई-वीजा सुविधा जारी रखने पर सोच रही है। रिजीजू ने कहा, ''यह फैसला हुआ है कि इस बात का एलान चीन में किया जाएगा। यह कोई वीजा ऑन अराइवल जैसी चीज नहीं है, बस इलेक्ट्रॉनिक वीजा भर है। जो भी विदेशी इसके लिए अप्लाई करेगा, वह स्क्रीनिंग के बाद ही भारत आ सकेगा। जो पाबंदियां हैं, वो पहले की तरह जारी रहेंगी। ''


कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि चीन के साथ भारत के रिश्तों में एक नए युग की शुरुआत होने वाली है. पूरी दुनियां में घूम घूम कर मोदी जी भारत की एक अच्छी छवि बना रहे हैं; ताकि बड़े पैमाने पर भारत में विदेशी पूंजी निवेश हो सके. हमारा देश एक मजबूत ढांचागत संरचना विकसित कर सके; जिसकी नीवं पर तेज विकास दर हासिल की जा सकेगी. इससे न सिर्फ गरीबी और बेरोजगारी पर काबू पाया जा सकेगा, बल्कि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर खर्च करने के लिए सरकार के पास धन भी उपलब्ध हो सकेगा.

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